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True Discount and Banker's Discount problems tricks in Hindi | fast track formulae for problem solving.

TRUE DISCOUNT AND BANKER'S DISCOUNT TRICKS IN HINDI

TRUE DISCOUNT 1). वास्तविक बट्टा = मिश्रधन - वर्तमान धन
2). यदि ब्याज की दर r% वार्षिक , समय t व वर्तमान धन (pw) है, तो वास्तविक बट्टा = PW×r×t/100
3). यदि r% तथा समय t के बाद देय धन A है, तो तत्काल धन pw = 100×A/(100+r.t)
4). यदि देय धन A पर r% व समय t दिए गए है, तो वास्तविक बट्टा = A.r.t /(100+r.t)
5). यदि किसी निश्चित समय के पश्चात निश्चित वार्षिक दर पर, देय धन पर वास्तविक बट्टा (TD) व समान समय व दर के लिए साधारण ब्याज (SI) हैं, तो देय धन A =      SI × TD/(SI - TD)
6). यदि t समय पश्चात r% वार्षिक दर पर, देय धन पर वास्तविक बट्टा (TD) व साधारण ब्याज (SI) है , तो -  SI - TD = TD×r×t/100
7). t वर्ष बाद r% चक्रवृद्धि दर पर देय धन A का तत्काल धन (PW) = A/(1+r/100)^t   व वास्तविक बट्टा = A - PW
BANKER'S DISCOUNT1). महाजनी बट्टा = शेष समय (समाप्त न हुए समय) के लिए बिल पर ब्याज = बिल की राशि × दर × शेष समय /100
2). महाजनी लाभ = महाजनी बट्टा - वास्तविक बट्टा
3). यदि बिल का मान / अंकित मूल्य A है, समय t व दर r% है, तो महाजनी बट्टा = A×r×t/100
4).…

THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi

आज हम लॉज ऑफ नेचर में एक ऐसे विषय पर बात करने जा रहे हैं, जिसके बारे आप लोगो को जरूर पढ़ना चाहिए, क्यूंकि ये आपको सोचने पर मजबूर कर देगा, कि क्या ये सच है, यदि ये संभव है तो कैसे?

पूर्व की कई प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं में चेतना की तीन अवस्थाओं का वर्णन मिलता है,जहां इंसान रोज़ जाता है,सोते समय,जागते हुए और सपनों में,लेकिन चेतना की एक और अवस्था भी है जिसे हम खगोलीय चेतना कहते है,जो भौतिक दुनिया से बिल्कुल अलग होती है,असल में वो ब्रह्मांड का पूरा इतिहास है।हालांकि हम उसे अपनी आंखों से देख नहीं सकते,लेकिन इलेक्ट्रोमैगनेटिक वव्स की एक आभासी दुनिया भी है
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
जो हमारी दुनिया से मिलती है,और उन तरंगों का विशाल नेटवर्क पूरी जानकारियों और आंकड़ों को अपने अंदर समेटे हुए है,जिनके उपर हम आज के युग में निर्भर हैं। वो उस चीज की जान है जिसे आज हम क्लाउड कहते हैं और उसके अंदर दूर से हीं करोड़ों गीगाबाइट के आंकड़े जमा होते हैं, इतिहासकार मानते हैं एक सुपर इंटरगलैक्टिक कंप्यूटर नेटवर्क की कल्पना सबसे पहले वैज्ञानिक जे सी आर लेक राइडर ने 1960 के दशक में किया था,मगर प्राचीन अंतरिक्ष विचारक थेरेस मानते हैं कि इसकी शुरुआत तो काफी समय पहले ही हो गया था, हमारे अतीत में।
कोरबा द्वीप, रायचूर भारत,ज्ञान की तलाश में बहुत से धार्मिक तीर्थ यात्री यहां नारद के मंदिर में आते हैं,हिन्दू धर्म ग्रंथ के मुताबिक नारद में एक आलौकिक क्षमता थी कि वे छिपी हुई दुनिया में भी चले जाते थे,जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते थे,वो दुनिया थी खगोलीय ज्ञान की।  नारद की चर्चा हमें रामायण,महाभारत और पुराणों में भी मिलती है,माना जाता है कि नारद तीनों लोको में घूमते थे,और वहां से जमा किए ज्ञान का प्रचार जगह जगह करते थे,धर्म ग्रंथो में नारद को एक मार्ग दर्शक के रूप में भी जाना जाता है।नारद को नारद मुनि या नारद ऋषि कहा जाता है। ऋषिओ की ये क्षमता होती है कि ये सीधे सीधे ब्रह्मांड से ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं।नारद इसलिए भी दिलचस्प लगते हैं,क्यूंकि वे दिव्य खगोलीय संरचना से भी ज्ञान प्राप्त कर लेते थे, जो अन्य देवताओं के लिए टेढ़ी खीर थी।
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
खगोलीय ज्ञान के उस दूसरी दुनिया के भंडार को आज हम अकशिक रिकॉर्ड के नाम से जानते हैं।1883 में इसे ये नाम दिया था,लेखक अल्फ्रेड पर्सी सेनेट ने अपनी किताब ईएसेट्रिक बुधिज्म में,इस किताब में उन्होंने लिखा है,पूर्व के दर्शन में ये माना जाता है,की वो व्यापक ज्ञान भौतिक रूप में एक ऎसी दुनिया में संगृहीत हैं,जिसे आकाश कहते हैं,और वहां तक सिर्फ ज्ञानी लोग ही पहुंच सकते हैं।

आकाशिक संस्कृत भाषा का एक शब्द है,जिसका मतलब होता है आसमान, तो हम इस लिहाज से इसे खगोलीय ज्ञान का क्षेत्र कह सकते हैं,वह ज्ञान उसी ब्रह्मांड में समाया है,आसमान में लिखा है वो वह कोई वैसा ज्ञान नहीं की हम उसे उसके भौतिक रूप में प्राप्त कर सकें।
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
उस ज्ञान तक सिर्फ अपनी मानसिक शक्ति से,अपनी आध्यात्मिक वेवलेंथ से हीं पहुंच सकते हैं,इसे पाने का और कोई तरीका नहीं है।
ब्रह्मांड बिना तार का एक अनंत नेटवर्क है,जिसमें सिर्फ हमारी सोंच या विचार ही नहीं जमा हैं,वल्कि इस ब्रह्मांड में मौजूद हर प्राणी की जानकारी जमा है,और ज्ञान का ये विशाल भंडार हमारे साथ तब से हैं जब से इस ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है।
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
अक़ाशिक रिकॉर्ड ही वह स्रोत है जहां से हर आविष्कार का जन्म हुआ हर कला का उद्गम हुआ या जो भी आविष्कार होने वाला है और जो भी नई जानकारी हमे मिलने वाली है,वो सब हमे वहीं से मिलेगा,हमारा दिमाग एक यंत्र है जो उस खगोलीय ज्ञान के क्लाउड से जुड़ता है और उसके ज्ञान को प्राप्त करता है, और इस भौतिक दुनिया में इसका प्रयोग दिखता है।
ये खगोलीय ज्ञान का क्षेत्र हमे दिखाई नहीं देता,किन्तु हम वहां तक अपनी आत्मा के माध्यम से पहुंच सकते है और उस ज्ञान को प्राप्त कर सकते हैं,जो हमसे छुपी हुई हैं,वो ज्ञान अपनी जगह हमेशा बना रहता है किन्तु उसके दरवाजे वहीं खोल सकता है,जो उसके खोलने का तरीका जानता हो।
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
अकाशिक रिकॉर्ड वास्तव में एक ज्ञान का एक ऐसा भंडार है जिसका इस्तेमाल इस ब्रह्मांड का हर जीव कर सकता है,और शायद परग्रही भी इसका प्रयोग कर सकते हैं और शायद करते भी हैं।ब्रह्मांड के उस दिव्य खगोलीय ज्ञान को प्राप्त करने के लिए अपने मन पर काबू और उसे शांत करना पड़ता है।
जिस भी व्यक्ति का मन जितना ज्यादा शांत होगा उसके मन से निकलने वाली खगोलीय तरंगों की वेवलेंथ भी उत्नही लंबी होगी और और उस ज्ञान के क्षेत्र तक जल्दी भी पहुंचेगी।
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
यदि ज्ञान का कोई ऐसा दिव्य खगोलीय क्षेत्र सचमुच है,तो क्या इंसान भी वहां तक जा सकता है।
इससे जुड़े कुछ और सबूत शायद इससे मिल सकें कि गहन शांति की अवस्था में हमारे दिमाग में क्या होता है।
तो क्या कहा जा सकता है की आकशिक फील्ड भी हमारे क्लाउड जैसा ही है,जिसमें क्लाउड से कहीं ज़्यादा आंकड़े जमा हैं,यदि ये सच है तो उस क्षेत्र में ये आंकड़े कौन अपलोड कर रहा है और क्यूं।ये है the akashic record.

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Boat and stream short-tricks in Hindi | Fast track arithmetic formulae for competitive examination.

BOAT AND STREAM (नाव एवं धारा)
1). यदि शांत जल में नाव या तैराक की चाल x किमी/घंटा व धारा की चाल y किमी/घंटा है, तो धारा के अनुकूल नाव अथवा तैराक की चाल = (x+y) किमी/घंटा
2). धारा के प्रतिकूल नाव अथवा तैराक की चाल = (x-y) किमी /घंटा
3). नाव की चाल = (अनुप्रवाह चाल + उद्धर्वप्रवाह चाल)/2
4). धारा की चाल =  (अनुप्रवाह चाल - उद्धर्वप्रवाह चाल)/2
5). यदि धारा की चाल a किमी/घंटा है, तथा किसी नाव अथवा तैराक को उद्धर्वप्रवाह जाने में अनुप्रवाह जाने के समय का n गुना समय लगता है,(समान दूरी के लिए), तो शांत जल में नाव की चाल = a(n+1)/(n-1) किमी/घंटा
6). शांत जल में किसी नाव की चाल x किमी/घंटा व धारा की चाल y किमी/घंटा है, यदि नाव द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने व जाने में T समय लगता है, तो दोनो स्थानों के बीच की दूरी = T(x^2 - y^2)/2x km
7). कोई नाव अनुप्रवाह में कोई दूरी a घंटे में तय करती है, तथा वापस आने में b घंटे लेती है, यदि नाव कि चाल c किमी/घंटा है, तो शांत जल में नाव की चाल = c(a+b)/(b-a) km/h
8). यदि शांत जल में नाव की चाल a किमी/घंटा है, तथा वह b किमी/घंटा की चाल से बहती हुई नदी में गत…

Emergence of British East India Company as an Imperialist Political Power in India

EMERGENCE OF BRITISH EAST INDIA COMPANY AS AN IMPERIALIST POLITICAL POWER IN INDIA
Dynamically changing India during early eighteenth century had a substantially growing economy under the authority of Mughal emperor Aurangzeb. But after his demise in 1707, several Mughal governors established their control over many regional kingdoms by exerting their authority. By the second half of eighteen century, British East India Company emerged as a political power in India after deposing regional powers and dominating over Mughal rulers. The present article attempts to analyze the reasons for emergence of British East India Company as an imperial political power in India and their diplomatic policies of territorial expansion. In addition to this, I briefly highlighted the Charter Acts (1773, 1793, 1813, 1833 and 1853) to trace its impact on the working process of Company.Establishment of East India Company in India

In 1600, British East India Company received royal charter or exclusive license…

Three dimensional geometry (part-1) | study material for IIT JEE | concept booster , chapter highlights.

THREE DIMENSIONAL GEOMETRY

ORIGIN
In the following diagram X'OX , Y'OY and Z'OZ are three mutually perpendicular lines , which intersect at point O. Then the point O is called origin.
COORDINATE AXES 
In the above diagram X'OX is called the X axes, Y'OY is called the Y axes and Z'OZ is called the Z axes.
COORDINATE PLANES 
1). XOY is called the XY plane. 2). YOZ is called the YZ plane. 3). ZOX is called the ZX plane.
If all these three are taken together then it is called the coordinate planes. These coordinates planes divides the space into 8 parts and these parts are called octants.
COORDINATES  Let's take a any point P in the space. Draw PL , PM and PN perpendicularly to the XY, YZ and ZX planes, then
1). LP is called the X - coordinate of point P. 2). MP is called the Y - coordinate of point P. 3). NP is called the Z - coordinate of the point P.
When these three coordinates are taken together, then it is called coordinates of the point P.
SIGN CONVENTI…

A detailed unit conversion table in Hindi.

UNITS CONVERSION TABLE
CENTIMETRE GRAM SECOND SYSTEM (CGS)1). MEASUREMENT OF LENGTH (लंबाई के माप) 10 millimeter = 1 centimetres10 centimetre = 1 decimetres  10 decimetre = 1 metres 10 metre = 1 decametres 10 decametres = 1 hectometres 10 hectometres = 1 kilometres 10 kilometres = 1 miriametresMEASUREMENTS OF AREAS ( क्षेत्रफल की माप )  100 millimetre sq. = 1 centimetre sq.
 100 centimetre sq. = 1 decimetres sq. 100 decimetres sq. = 1 metre sq. 100 metre sq. = 1 decametres sq  100 decametres sq. = 1 hectometres sq. 100 hectometres sq. = 1 kilometres sq. 100 kilometres sq. = 1 miriametres sq.
MEASUREMENTS OF VOLUME ( आयतन की माप) 1000 millimetre cube. = 1 centimetre cube.
 1000 centimetre cube. = 1 decimetres cube. 1000 decimetres cube. = 1 metre cube. 1000 metre cube. = 1 decametres cube. 1000 decametres cube. = 1 hectometres cube. 1000 hectometres cube. = 1 kilometres cube. 1000 kilometres cube. = 1 miriametres cube.
MEASUREMENTS OF VOLUME OF LIQUIDS  (द्रव्य के आयतन का माप) 10 millilitre=…

THE GENERAL THEORY OF RELATIVITY | A Unique way to explain gravitational phenomenon.

Today we are going to talk about a very important and revolutionary concept that is THE GENERAL THEORY OF RELATIVITY.
This theory came into existence after 10 years of special theory of relativity (1905), and published by Albert Einstein in 1915.
This theory generalise the special theory of relativity and refines the Newton's laws of universal gravitation.
After coming this theory people's perspective about space and time has been changed completely. And this theory give a new vision to understand the spacetime geometry.
This theory gives a unified description of gravity as a geometrical properties of space and time.
This theory helps us to explain some cosmological phenomenon that is ,

* why small planets revolve around the big stars?
* Why everything in this universe is keep moving?
* Why mostly planets and stars are spherical in shape?
* Why does gravity create?
* Why does time become slow near the higher gravitating mass. Ie. Gravitational time dilation.
And gravitational…