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The Revolt of 1857: The Broader Manifestation of Emerging Mass Nationalism in India 🇮🇳

The Revolt of 1857: The Broader Manifestation of Emerging Mass Nationalism in India 🇮🇳सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। - सुभद्रा कुमारी चौहान (भारतीय कवि)
Around 3000 rebellious Indian soldiers erupted with excessive outrage on 10 May 1857 against the oppressive colonial system in the garrison town of Merrut. Crossing Jamuna river, the revolutionaries entered Delhi, attacked British cavalry posts, police stations, killed European officials and ascertained their control over Red Fort and Salimgarh Fort. The upsurging rebellion gained the political support of Nana Saheb- the adopted son of late Peshwa Baji Rao, the queen of Jhansi Rani Laxmibai, Mughal Emperor Bahadur Shah ZafarTantia Tope, Rani Awantibai. Identifying with the ong…

THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi

आज हम लॉज ऑफ नेचर में एक ऐसे विषय पर बात करने जा रहे हैं, जिसके बारे आप लोगो को जरूर पढ़ना चाहिए, क्यूंकि ये आपको सोचने पर मजबूर कर देगा, कि क्या ये सच है, यदि ये संभव है तो कैसे?

पूर्व की कई प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं में चेतना की तीन अवस्थाओं का वर्णन मिलता है,जहां इंसान रोज़ जाता है,सोते समय,जागते हुए और सपनों में,लेकिन चेतना की एक और अवस्था भी है जिसे हम खगोलीय चेतना कहते है,जो भौतिक दुनिया से बिल्कुल अलग होती है,असल में वो ब्रह्मांड का पूरा इतिहास है।हालांकि हम उसे अपनी आंखों से देख नहीं सकते,लेकिन इलेक्ट्रोमैगनेटिक वव्स की एक आभासी दुनिया भी है
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
जो हमारी दुनिया से मिलती है,और उन तरंगों का विशाल नेटवर्क पूरी जानकारियों और आंकड़ों को अपने अंदर समेटे हुए है,जिनके उपर हम आज के युग में निर्भर हैं। वो उस चीज की जान है जिसे आज हम क्लाउड कहते हैं और उसके अंदर दूर से हीं करोड़ों गीगाबाइट के आंकड़े जमा होते हैं, इतिहासकार मानते हैं एक सुपर इंटरगलैक्टिक कंप्यूटर नेटवर्क की कल्पना सबसे पहले वैज्ञानिक जे सी आर लेक राइडर ने 1960 के दशक में किया था,मगर प्राचीन अंतरिक्ष विचारक थेरेस मानते हैं कि इसकी शुरुआत तो काफी समय पहले ही हो गया था, हमारे अतीत में।
कोरबा द्वीप, रायचूर भारत,ज्ञान की तलाश में बहुत से धार्मिक तीर्थ यात्री यहां नारद के मंदिर में आते हैं,हिन्दू धर्म ग्रंथ के मुताबिक नारद में एक आलौकिक क्षमता थी कि वे छिपी हुई दुनिया में भी चले जाते थे,जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते थे,वो दुनिया थी खगोलीय ज्ञान की।  नारद की चर्चा हमें रामायण,महाभारत और पुराणों में भी मिलती है,माना जाता है कि नारद तीनों लोको में घूमते थे,और वहां से जमा किए ज्ञान का प्रचार जगह जगह करते थे,धर्म ग्रंथो में नारद को एक मार्ग दर्शक के रूप में भी जाना जाता है।नारद को नारद मुनि या नारद ऋषि कहा जाता है। ऋषिओ की ये क्षमता होती है कि ये सीधे सीधे ब्रह्मांड से ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं।नारद इसलिए भी दिलचस्प लगते हैं,क्यूंकि वे दिव्य खगोलीय संरचना से भी ज्ञान प्राप्त कर लेते थे, जो अन्य देवताओं के लिए टेढ़ी खीर थी।
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
खगोलीय ज्ञान के उस दूसरी दुनिया के भंडार को आज हम अकशिक रिकॉर्ड के नाम से जानते हैं।1883 में इसे ये नाम दिया था,लेखक अल्फ्रेड पर्सी सेनेट ने अपनी किताब ईएसेट्रिक बुधिज्म में,इस किताब में उन्होंने लिखा है,पूर्व के दर्शन में ये माना जाता है,की वो व्यापक ज्ञान भौतिक रूप में एक ऎसी दुनिया में संगृहीत हैं,जिसे आकाश कहते हैं,और वहां तक सिर्फ ज्ञानी लोग ही पहुंच सकते हैं।

आकाशिक संस्कृत भाषा का एक शब्द है,जिसका मतलब होता है आसमान, तो हम इस लिहाज से इसे खगोलीय ज्ञान का क्षेत्र कह सकते हैं,वह ज्ञान उसी ब्रह्मांड में समाया है,आसमान में लिखा है वो वह कोई वैसा ज्ञान नहीं की हम उसे उसके भौतिक रूप में प्राप्त कर सकें।
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
उस ज्ञान तक सिर्फ अपनी मानसिक शक्ति से,अपनी आध्यात्मिक वेवलेंथ से हीं पहुंच सकते हैं,इसे पाने का और कोई तरीका नहीं है।
ब्रह्मांड बिना तार का एक अनंत नेटवर्क है,जिसमें सिर्फ हमारी सोंच या विचार ही नहीं जमा हैं,वल्कि इस ब्रह्मांड में मौजूद हर प्राणी की जानकारी जमा है,और ज्ञान का ये विशाल भंडार हमारे साथ तब से हैं जब से इस ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है।
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
अक़ाशिक रिकॉर्ड ही वह स्रोत है जहां से हर आविष्कार का जन्म हुआ हर कला का उद्गम हुआ या जो भी आविष्कार होने वाला है और जो भी नई जानकारी हमे मिलने वाली है,वो सब हमे वहीं से मिलेगा,हमारा दिमाग एक यंत्र है जो उस खगोलीय ज्ञान के क्लाउड से जुड़ता है और उसके ज्ञान को प्राप्त करता है, और इस भौतिक दुनिया में इसका प्रयोग दिखता है।
ये खगोलीय ज्ञान का क्षेत्र हमे दिखाई नहीं देता,किन्तु हम वहां तक अपनी आत्मा के माध्यम से पहुंच सकते है और उस ज्ञान को प्राप्त कर सकते हैं,जो हमसे छुपी हुई हैं,वो ज्ञान अपनी जगह हमेशा बना रहता है किन्तु उसके दरवाजे वहीं खोल सकता है,जो उसके खोलने का तरीका जानता हो।
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
अकाशिक रिकॉर्ड वास्तव में एक ज्ञान का एक ऐसा भंडार है जिसका इस्तेमाल इस ब्रह्मांड का हर जीव कर सकता है,और शायद परग्रही भी इसका प्रयोग कर सकते हैं और शायद करते भी हैं।ब्रह्मांड के उस दिव्य खगोलीय ज्ञान को प्राप्त करने के लिए अपने मन पर काबू और उसे शांत करना पड़ता है।
जिस भी व्यक्ति का मन जितना ज्यादा शांत होगा उसके मन से निकलने वाली खगोलीय तरंगों की वेवलेंथ भी उत्नही लंबी होगी और और उस ज्ञान के क्षेत्र तक जल्दी भी पहुंचेगी।
THE AKASHIC RECORD A UNIVERSAL OCEAN OF INFINITE KNOWLEDGE | explained in Hindi
यदि ज्ञान का कोई ऐसा दिव्य खगोलीय क्षेत्र सचमुच है,तो क्या इंसान भी वहां तक जा सकता है।
इससे जुड़े कुछ और सबूत शायद इससे मिल सकें कि गहन शांति की अवस्था में हमारे दिमाग में क्या होता है।
तो क्या कहा जा सकता है की आकशिक फील्ड भी हमारे क्लाउड जैसा ही है,जिसमें क्लाउड से कहीं ज़्यादा आंकड़े जमा हैं,यदि ये सच है तो उस क्षेत्र में ये आंकड़े कौन अपलोड कर रहा है और क्यूं।ये है the akashic record.

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" THE LAWS OF NATURE" प्रकृति के नियम, जिससे कोई भी बच नहीं सकता, आप भी नहीं | प्रकृति के तीन गुण क्या है?|

"लॉज ऑफ नेचर" कहता है -

* प्रकृति क्या है?
 किसी राष्ट्र या देश को आदर्श राष्ट्र या देश बनाने के लिए निःसंदेह एक आदर्श कानून व्यवस्था की आवश्यकता होती है, जिसके नजर में उस देश में रहने वाला सूक्ष्म जीव से लेकर विशालकाय जीव तक सभी एक समान होते है। किसी देश का स्वामी एक मनुष्य हो सकता है, इस पृथ्वी का स्वामी भी एक मनुष्य हो सकता है, किन्तु क्या इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का स्वामी भी एक मनुष्य हो सकता है, शायद नहीं .... अब यहां पर एक प्रश्न है उठता है, कि क्या इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को भी किसी स्वामी की आवश्यकता है? यदि किसी देश को स्वामी कि आवश्यकता है, यदि पृथ्वी को किसी स्वामी की आवश्यकता है, तो यकीनन इस ब्रह्मांड को भी एक स्वामी कि आवश्यकता है। इस ब्रह्मांड का स्वामी जो कोई भी है, उसके लिए ये पूरा ब्रह्मांड एक देश जैसा है, जिसके भीतर हमारे जैसे असंख्य जीव रह रहे है, इस ब्रह्मांड में हम अकेले नहीं है। यदि ये पूरा ब्रह्मांड एक देश है, तो निश्चित ही इस देश का भी एक नियम होगा कोई कानून होगा। यदि हम किसी देश की बात करें तो वहां कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैनिकों को तैनात किया …

THE GENERAL THEORY OF RELATIVITY | A Unique way to explain gravitational phenomenon.

Today we are going to talk about a very important and revolutionary concept that is THE GENERAL THEORY OF RELATIVITY.
This theory came into existence after 10 years of special theory of relativity (1905), and published by Albert Einstein in 1915.
This theory generalise the special theory of relativity and refines the Newton's laws of universal gravitation.
After coming this theory people's perspective about space and time has been changed completely. And this theory give a new vision to understand the spacetime geometry.
This theory gives a unified description of gravity as a geometrical properties of space and time.
This theory helps us to explain some cosmological phenomenon that is ,

* why small planets revolve around the big stars?
* Why everything in this universe is keep moving?
* Why mostly planets and stars are spherical in shape?
* Why does gravity create?
* Why does time become slow near the higher gravitating mass. Ie. Gravitational time dilation.
And gravitational…

Was East India Company supremely functioning as a Colonial Trading Group till 1857?

Was British East India Company supremely functioning as a Colonial Trading Group till 1857?

After acquiring the royal charter from the ruler of England in 1600, the British East India Company attained a monopoly on trade with East. The company eliminated competition in business; asserted control over Bengal after Battle of Plassey 1757; achieved Diwani rights ( i.e. revenue collection rights over Bengal, Bihar and Orisha) after Treaty of Allahabad 1765 and emerged as a supreme political power by the middle eighteenth century. But interestingly, the company experienced financial collapse by the second half of the eighteenth century because of nepotism and persistence of corruption in company officials. ( Such corrupt officials were often referred as nabobs- an anglicised form of the nawab.)
British Parliamentary Government investigated the inherent functioning of the company and introduced several acts to induce discipline in the company officials. Regulating Act/ Charter Act (1773):Thi…

THE SPECIAL THEORY OF RELATIVITY | understanding the basic concepts.

Today we are going to talk about a very interesting concept of classical mechanics,
And which topic we are going to talk about today, is always being a subject of discussion so far. Most of the people can't understand this concept after reading once, but today we are going to talk about this with a simplified explanation... If you want to understand then read it till end.
We are talking about , THE SPECIAL THEORY OF RELATIVITY. Which are originally proposed by the genius Albert Einstein in 26 September 1905 with the title of  " ON THE ELECTRODYNAMICS OF MOVING BODY". And it is generally accepted and experimentally confirmed physical theory.
After coming this theory , the way of watching the universe has been changed completely.
If we want to understand this theoretical concept. Then we have to start it from starting point. Then let's start...
Going further in the article , we have to take a look at the basic idea behind this theory , which is termed as the postulate…

Metamorphosing Sociopolitical Matrix of India under rule of East India Company

Metamorphosing Sociopolitical Matrix of India under the Regime of East India Company till 1857






Under the colonial rule of the British Imperial Legislative Government and East India Company, the sociopolitical structure of India had undergone a massive change at several levels. East India Company was evolving as a crucial political strength in India by late eighteenth century after deposing prominent regional powers like Bengal, Bombay etc. The Company introduced repressive policies for expansion of territories as elaborated in the article Emergence of East India Company as an Imperialist Political Power in India.
Functioning as an administrative and political entity in India, EIC launched numerous political, social and education-related policies that considerably affected various sections of society like peasants, women, children, industrial sectors and handicrafters. The prime objective of this article is to shed light on the sociopolitical matrix of British India to understand the sta…